फॉलो और जॉइन करें
फिलहाल इंटरनेट हर किसी के रोज की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। कई लोगों के दिन की शुरुवात ही सोशल मीडिया से होती है। हम जो भी इंटरनेट इस्तेमाल करते है वो पूरे इंटरनेट का केवल ४ से ५ प्रतिशत है। इसे सरफेस वेब कहा जाता है। जिसे हम जैसे साधारण लोग इस्तेमाल करते है।
विषयसूची
डार्क वेब
इंटरनेट का ४ से ५ प्रतिशत हिस्सा साधारण लोग इस्तेमाल करते है। तो बचा हुआ ९४ प्रतिशत हिस्से का भी इस्तेमाल हम करते है पर वो काफी कम इस्तेमाल होता है हमारे द्वारा। उसे डीप वेब कहा जाता है। बचे हुआ हिस्से का इस्तेमाल लोग लोगों को फ़साने के लिए करते है। सारे काले धंधे यहीं पर होते है। वैसे इसका इस्तेमाल करना कोई गैरकानूनी चीज नहीं है पर इसका इस्तेमाल करके लोगों को फ़साना गैरकानूनी है। डार्क वेब का ज्यादा तर इस्तेमाल हैकर करते है।
या डार्क वेब (Dark Web) चा वापर अनधिकृतरित्या बंदुकी विकत घेणे, लोकांची माहिती विकणे, ड्रग्स विकणे, लोकांची मिळालेली माहिती वापरुन त्यांच्याकडून खंडणी गोळा करणे अशा वेगवेगळ्या कामासाठी याचा वापर होतो. अंडरवर्ल्ड याचा वापर करत असतो. पण याचा वापर फक्त वाईट कामांसाठी होत असतो असं पण नाही. काही शोध पत्रकार (investigating journalist) हे पण याचा वापर कर असतात. याचा वापर करून ते सरकारी-कॉर्पोरेट घोटाळे उघडकीस आणत असतात.
इस डार्क वेब का इस्तेमाल गैरकानूनी बंदूक बेचने के लिए, लोगों की जानकारी बेचने के लिए, ड्रग्स बेचने के लिए, लोगों से मिली जानकारी इस्तेमाल कर उनसे फिरौती मांगने के लिए ऐसे अलग अलग कामों के लिए किया जाता है। अंडरवर्ल्ड भी इसका इस्तेमाल करता है। पर इसका इस्तेमाल सिर्फ बुरे कामों के लिए ही होता है ऐसा कुछ नहीं है। कुछ शोध पत्रकार (investigating journalist)भी इसका इस्तेमाल करते है। या फिर मुझ जैसे साइबर सिक्युरिटी researcher भी करते है।
डार्क वेब क्यों इस्तेमाल करते है?
डार्क वेब onion routing तकनीक पर काम करता है। जिसकी मदद से यूजर को काफी ज्यादा प्राइवसी मिलती है। इससे उनको ट्रैक करना असंभव हो जाता है। इसी लिए हैकर इसे पसंत करते है।
- साइबर सुरक्षा क्या है?
- लैपटॉप सुरक्षा टिप्स
- जीमेल सुरक्षा टिप्स हिन्दी
- फ्री पब्लिक डीएनएस सर्वर
- बेस्ट एंटिवायरस मोबाईल के लिए
डार्क वेब पर जानकारी कैसे जाती है?
आपने कई बारी ये सुना होगा की किसी कंपनी का डाटा ब्रीच हुआ है, ऐसे हमलों से ही हमारी जानकारी डार्क वेब पर चली जाती है। हैकर कंपनी के वेबसाईट की वल्नरबिलिटी ढूंढ कर उनके डेटाबेस से जानकारी चुरा लेता है। फिर उसके लिए कंपनी से पैसे मांग लेता है। इसकी काफी गारंटी होती है की पैसे देने पर वो इस जानकारी डार्क वेब पर नहीं डालेंगे।
हमारी जानकारी का कैसे इस्तेमाल किया जाता है?
कदाचित उन्हे डार्क वेब पर ही ज्यादा पैसे मिलते हो। वो दोनों तरफ से पैसे कमाते है। फिर ये जानकारी स्कैमर खरीदते है और हमें फ़साने की कोशिश करते रहते है। इन डाटा लीक में हमारा फोन नंबर, पता, क्रेडिट कार्ड की जानकारी, सोशल मीडिया अकाउंट की जानकारी, पासवर्ड आदि चीजें डार्क वेब पर होती है।
कभी कभी हमारे पॅन कार्ड और आधार कार्ड की जानकारी भी लीक होती है। जिनका इस्तेमाल करके वो हमारे नाम पर कर्ज भी ले सकते है या फिर हमारे आधार कार्ड का इस्तेमाल करके नया सिम भी ले सकते है। जून २०२३ में तो ऐसी जानकारी मिल रही थी की कोविन पोर्टल ब्रीच हुआ था और इसकी सारी जानकारी एक टेलीग्राम बॉट के जरिए मिल रही थी।
डार्क वेब मॉनिटरिंग मतलब क्या?
बाजार कई सारी कंपनिया है जो आपके लिए आपकी जानकारी नजर रख सकती है। पर इसके लिए उन्हें पैसे देने पड़ेंगे। पर कुछ ऐसी भी वेबसाईट है जो ये सुविधा मुफ़्त में उपलब्ध कराती है। पर इसके लिए आपको समय समय पर उनके वेबसाईट जाकर देखना पड़ेगा। मै आपको दोनों पर्याय बताऊँगा।
पर अगर आपकी जानकारी डार्क वेब पर मिल जाती है तो क्या करे? कोनसी जानकारी मिली है ये उसपर निर्भर है। मतलब अगर आपके पासवर्ड लीक हुए है तो उसी समय उन्हें बदल दें और फिर कभी उनका इस्तेमाल ना करें। और अगर आपका जीमेल मिला है तो फिर उसका पासवर्ड बदल दें और उससे जुड़े सारे अकाउंट के भी पासवर्ड बदल दें। अगर आपको पासवर्ड याद नहीं रहते है तो फिर आप पासवर्ड मैनेजर का भी इस्तेमाल कर सकते है। कुछ फ्री पासवर्ड मैनेजर भी मिलते है आप उनका इस्तेमाल कर सकते है। नीचे दी गई लिंक पर क्लिक करके देख सकते है।
अगर आपके क्रेडिट कार्ड की जानकारी डार्क वेब पर लीक हो जाती है तो उसका पिन बदल दीजिए और सतर्क रहे। अगर आपको एक आदत है की आप किसी भी वेबसाईट पर अपना क्रेडिट कार्ड नंबर सेव्ह करते तो वो बदल दें। नसीब कब खराब हो सकता है ये कहा नहीं जा सकता। वेबसाईट कभी भी हैक हो सकती है। पर अगर पॅन और आधार कार्ड की जानकारी मिल जाती है तो हम कुछ नहीं कर सकते, उन्हे बदल भी नहीं सकते। इसलिए आपको सतर्क रहना पड़ेगा।
कुछ ऐसी मुफ़्त वेबसाईट है जो बताते है की आपकी जानकारी डार्क वेब पर है या नहीं।
नीचे दी गई लिंक पर क्लिक करके आप देख सकते है।
फ्री डार्क वेब लीक चेकर
Cyble फ्री डार्क वेब मॉनिटरिंग टूल
इस टूल की मदद से आप नाम, ईमेल, आपका आईपी अड्रेस, फोन नंबर, यूजरनेम, क्रेडिट कार्ड नंबर ये चीजे भी देख सकते है।
Logo Credits: To all the respective brands
खरीद कर
ऐसी कई प्रसिद्ध कंपनिया है जो ये सुविधा देने के लिए पैसे लेती है। जैसे McAfee की ये सुविधा इस्तेमाल करने के लिए आपको उनका एंटिवाइरस खरीदना पड़ेगा। और भी एक कंपनी है Bitdefender इनका अलग से एक प्रोडक्ट आता है डिजिटल आइडेंटिटी प्रोटेक्शन नाम का या फिर आप उनका प्रीमियम एंटिवाइरस प्लान खरीद सकते है।
अगर आप गूगल वन का इस्तेमाल करते है तो गूगल उस ईमेल से जुड़ी कोई भी जानकारी लीक होती है तो आपको बता देगा पर अगर आपने गूगल वन का सब्स्क्रिप्शन नहीं लिया तो भी आप चेक कर सकते है बस आपको ये काम उनके वेबसाईट पर जाके खुद करना पड़ेगा। दूसरी एंटिवाइरस कंपनियां भी ऐसी सुविधा देती है।
ऐसी सुविधा खरीदने एक फायदा है वो ऐसा जब भी आपका ईमेल डार्क वेब पर लीक होगा तब ये कंपनी आपको बता देगी आपको हर बार किसी वेबसाईट पर जाके चेक करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
Leave a Reply